इस संसार में केवल और केवल आप ही अकेले वो व्यक्ति हैं, जो इस बात का निर्णय लेने में सक्षम और समर्थ हैं कि-
आप अपने अमूल्य और आलौकिक जीवन को बर्बाद होते हुए देखना चाहते हैं? या
आप अपने अमूल्य जीवन को जीने की वर्तमान पद्धति, अपनी सोचने की रीति, खानपान की रीति और अपने तथा दूसरों के प्रति आपकी सोचने, समझने और चिन्तन करने की धारा को सकारात्मक दिशा देकर वास्तविक अर्थों में अपने जीवन को पूर्णता से जीना चाहते हैं या नहीं?